भारत-नेपाल सीमा पर विगत 23 सितंबर से चल रही नाकेबंदी का फायदा कई लोग अपनी जेबें भरने में कर रहे हैं। नेपाल में ईंधन की जबर्दस्त किल्लत है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’
की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की तरफ से कुछ टैक्सी ड्राइवर ईंधन टैंक फुल कराते हैं और फिर उसे बॉर्डर पर बनवासा में खाली कर देते हैं। वहां से बिचौलिए ईंधन के कैन भर के ले जाते हैं और नेपाल में मोटी कीमत पर बेचते हैं।
बताया जा रहा है कि भारत के उत्तर प्रदेश में 52 प्रति लीटर मिलने वाला डीजल नेपाल में 120 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इसी तरह 68 रुपये प्रति लीटर मिलने वाले पेट्रोल को नेपाल में 200 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। ईंधन की इस तस्करी में पैसेंजर वाहनों के साथ निजी वाहनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
सामान्य दिनों में भारत से ईंधन के 300 ट्रक सीमा पार कर नेपाल जाते थे। लेकिन मधेसी आंदोलन के चलते नाकेबंदी की वजह से अब इनकी संख्या घटकर 5 से 10 ट्रक रह गई है।
नेपाल में विकट स्थिति को देखते हुए कुछ ट्रैवल ऑपरेटर्स ने ईंधन की तस्करी को साइड बिजनेस बना लिया है। ये ईंधन से भरे वाहन सीमावर्ती महेंद्रनगर और भंडसार तक ले जाते हैं।
एक ड्राइवर ने नाम ना खोलने की शर्त पर बताया कि चम्पावत ज़िले में पड़ने वाले बनवासा की दूरी बरेली से 70 किलोमीटर और पीलीभीत से 25 किलोमीटर है। हमें वहां के लिए यात्री मिल जाते हैं तो क्यों ना कुछ अतिरिक्त ईंधन साथ ले जाया जाए।
कुछ टैक्सी ड्राइवर बिचौलियों का भी इस्तेमाल नहीं कर रहे। वो वैधानिक रूट से नेपाल में दाखिल होते हैं। इसके लिए वे 35 रुपये का भंसार( एक तरह की चुंगी) का भुगतान करते हैं। नेपाल में दाखिल होने के बाद वो ईंधन का टैंक खाली कर देते हैं। एक ट्रिप से ही 2700 से 3200 रुपये की कमाई कर ली जाती है।
हालांकि भारत की पुलिस और सहस्त्र सीमा बल के जवानों ने बॉर्डर पर गश्त बढ़ा दी है जिससे इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन बॉर्डर खुला होने की वजह से ईंधन की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगा पाना मुमकिन नहीं है।
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