जाली फेसबुक एकाउंट के जरिये उसने दोस्ती की। उसने खूबसूरत पुरुष की तरह खिंचवाई अपनी तस्वीर लगा रखी थी। रात-रात भर हम फोन पर बात करते थे। एक दिन हमने मिलने का फैसला किया और फिर शारीरिक
संबंध बनाने शुरू कर दिए।
उसके सेक्स करने का तरीका अजीब था, लेकिन वह अच्छा इंसान था। सब ठीक चल रहा था कि एक दिन पता चला कि वह लड़का नहीं, मेरी तरह लड़की है। पुरुषों के नकली प्राइवेट पार्ट के जरिये उसने अपनी पहचान छिपाई और संबंध बनाए। दरअसल, वह रजामंदी से बनाए गए संबंध नहीं रेप था।
उसने मेरे मन से मेरे साथ खिलवाड़ किया। यह बात मुझे जीने नहीं दे रही है। उस सेक्स को रेप कहा जाना चाहिए, जो उसने कई बार मेरे साथ किया। उसे पता था कि वह कौन है, और क्या कर रहा/ रही है। उसे यह करने में मजा आ रहा था। इसके बाद मैं कई दिनों तक ठीक से न तो खा पाती थी और न ही सो पाती थी।
यह दर्द है 28 वर्षीय पूर्व म्यूजिक स्टूडेंट कारोल का। उसके आरोपी फिओना मैन्सन को इस मामले में जज माइकल हीथ ने बरी कर दिया। इस फैसले से खफा कारोल ने अपनी पहचान छिपाने के अधिकार को खारिज करते हुए सामने आईं और उन्होंने पूरी कहानी विस्तार से बताई।
कारोल ने बताया कि फिओना अब ट्रांससेक्सुअल कायरन ली बन गई है। उसकी पहचान का पता तब चला, जब एक दिन मेरी मां ने उसे स्थानी मैक डोनाल्ड में काम करते हुए देखा। उसके बैज में लड़कियों का नाम लिखा था। इसका पता चलने के बाद मैं जिस दर्द में घिर गई, उसके चलते दो साल तक घर से बाहर नहीं निकल सकी।
मुझे काउंसलिंग लेनी पड़ी। मैं बहुत दुखी थी क्योंकि मैं जिससे बहुत प्यार करती थी, इस घटना का पता चलने के बाद मैंने उसे खो दिया। उसने मुझे धोखा दिया।
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